भगवान श्री कृष्ण की पावन जन्मभूमि मथुरा के चौमुहाँ गांव के एक कुलीन ब्राह्मण परिवार में श्री नागेश्वराचार्य जी महाराज का जन्म दिनांक 20 जुलाई 1995 को हुआ। महाराज जी के पिता पंडित तोता राम शास्त्री भगवान श्री कृष्ण के अनन्म भक्त थे तथा अपना संपूर्ण जीवन भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं के मंचन एवं भजन में समर्पित कर दिया। माता श्रीमति फूलवती देवी एवं पिता श्री के श्रीमुख से भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनने एवं भगवदकृपा से श्री महाराज की बाल्यकाल से ही भगवदभक्ति में लीन रहने लगे। आध्यात्मिकता की ओर श्री महाराज जी का लगाव बाल्यकाल से ही इतना रहा कि अपनी उत्तर मध्यमा तक की पढ़ाई गोकुल (महागन) रमणरेती में की। तत्पश्चात उच्च शिक्षा की प्राप्ति हेतु प्रसिद्ध स्थान काशी चले गए। वहां से आचार्य ने (M.A.) तक की पढ़ाई पूरी की। काशी से आचार्य तक की पढ़ाई पूरी करने के उपरांत श्री महाराज जी ने नई दिल्ली विश्वविद्यालय से विशिष्टचार्य (M.Phil) की पढ़ाई पूर्ण करने के उपरांत श्री लालबहादुरशास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से विद्यावारिधि (Ph.D) की पढ़ाई भी कर रहे हैं।
भगवान श्री के दिव्य चरित्रों की गाथा को श्रद्धा और भाव के साथ जनमानस तक पहुँचाने का कार्य कथा वाचन के माध्यम से किया जाता है, जिसमें भक्ति और ज्ञान का समन्वय होता है।
अंक ज्योतिष के माध्यम से गणितीय सिद्धांतों का उपयोग कर व्यक्ति के जीवन, स्वभाव और भविष्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्थक मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
द्वारिकाधीश गो सेवा संस्थान गौ, संत, वृद्ध एवं अनाथ सेवा के लिए समर्पित संस्था है, जो निरंतर सेवा कार्यों के साथ समाज में सहयोग और करुणा का भाव बढ़ाती है।